भारत

चीन की मांग से चांदी की कीमतों में तेजी, 30 दिन में कीमतों पर बेतहाशा उछाल

SHIDDHANT
19 Jan 2026 8:51 PM IST
चीन की मांग से चांदी की कीमतों में तेजी, 30 दिन में कीमतों पर बेतहाशा उछाल
x
चांदी ने तोड़ा इतिहास, MCX पर रिकॉर्ड रेट
Delhi दिल्ली: चांदी (Silver) की कीमतों ने ऐतिहासिक रिकार्ड तोड़ दिया है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर 19 जनवरी 2026 को चांदी का भाव पहली बार 3,00,000 रुपये प्रति किलो से ऊपर पहुंच गया और कारोबारी हफ्ते के पहले दिन 3,04,000 रुपये प्रति किलो के आसपास रहा। यह तेजी निवेशकों के लिए पिछले 3 महीने में भारी मुनाफे का मौका लेकर आई है। दरअसल, 19 दिसंबर 2025 को चांदी की कीमत 2,03,500 रुपये प्रति किलो थी। केवल 30 दिन में चांदी के भाव में लगभग 1 लाख रुपये की बढ़ोतरी हुई। पिछले एक साल के अंदर चांदी की कीमत 1 लाख रुपये से शुरू होकर अब 3 लाख रुपये प्रति किलो तक पहुंच चुकी है।

चांदी की कीमतों में इस उछाल का एक बड़ा कारण चीन है। चीन में चांदी अंतरराष्ट्रीय कीमत से ज्यादा (Premium) पर बिक रही है। इसका मतलब है कि घरेलू मांग, सप्लाई से ज्यादा है। यही कारण है कि लंदन और न्यूयॉर्क मार्केट में भी चांदी की कीमतें बढ़ रही हैं। चीन में मैन्युफैक्चरिंग और उत्पादन बढ़ने के साथ ही चांदी की डिमांड भी उछलती है। चीन दुनिया का सबसे बड़ा सोलर पैनल निर्माता और निर्यातक है। हर सोलर पैनल में चांदी का इस्तेमाल होता है, जिससे चांदी की वैश्विक मांग और मजबूत होती है।

इसके अलावा, ग्लोबल आर्थिक अनिश्चितता, मुद्रा बाजार की अस्थिरता और निवेशकों की सुरक्षित निवेश की तलाश ने भी चांदी की मांग बढ़ाई है। सोने की तुलना में चांदी ने बेहतर रिटर्न देने की वजह से निवेशकों की रुचि और बढ़ गई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी का उपयोग इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) और औद्योगिक जरूरतों के लिए भी बढ़ रहा है। चांदी की बेतहाशा तेजी का असर भारत में सराफा बाजार पर भी दिख रहा है। ग्राहकों की संख्या में गिरावट आई है और पारंपरिक उपयोग जैसे ज्वेलरी और आर्टिकल्स में फिजिकल चांदी की मांग थोड़ी कम हुई है। वहीं डिजिटल गोल्ड और चांदी ETF (Exchange Traded Funds) में निवेशकों की रुचि लगातार बनी हुई है।

अब सवाल उठता है कि इस उच्च भाव पर निवेश करना सही रहेगा या नहीं। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, शॉर्ट टर्म के लिए यह कदम जोखिम भरा हो सकता है। लेकिन अगर निवेश की नजर लंबी अवधि की है, तो धीरे-धीरे निवेश करना सही रहेगा। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि निवेशकों को अपना पोर्टफोलियो डायवर्सीफाई करना चाहिए और ग्लोबल अनिश्चितताओं को ध्यान में रखते हुए सुरक्षित निवेश विकल्प अपनाना चाहिए। इस तेजी के दौर में निवेशकों को सतर्क रहना आवश्यक है। चांदी का भाव भविष्य में ग्लोबल डिमांड, चीन प्रीमियम, वैश्विक आर्थिक स्थितियों और निवेशकों की भावनाओं पर निर्भर रहेगा।
Next Story